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आज के समाज के समक्ष सबसे बडी चुनौती यह है कि आधुनिक विकास तथा पारंपरिक नैतिक, सामाजिक व मानवीय मूल्यों के मध्य अर्थपूर्ण सामंजस्य किस प्रकार स्थापित किया जाये । कहने का तात्पर्य यह है कि आर्थिक, भौतिक प्रगति हमारे समाज के लिए अति आवश्यक है ताकि विशाल जनसमूह का जीवन स्तर ऊंचा उठ सके, दूसरी ओर इस प्रगति की दौड़ में हम अपना नैतिक मानवीय स्तर भी ऊंचा उठाये रखे । इस संदर्भ में उच्च शिक्षण संस्थाओं का सामाजिक-शैक्षणिक दायित्व एवं भूमिका बहुत अहम है ।

हमारा महाविद्यालय इस दायित्व व भूमिका के प्रति सतत रूप से सजग है । हमारा लक्ष्य है - समाज के सभी वर्गो के लिए गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराना । हमारा विश्वास है कि गुणवत्तापरक शिक्षा ही वह अस्त्र है जिसके माध्यम से अज्ञानता, पिछड़ापन एवं बेरोजगारी जैसी समस्याओं से प्रभावकारी ढंग से लडा जा सकता है । हम सभी जानते है कि जिस दौर में हम जी रहे है वह कठोर प्रतियोगिता का दौर है । इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए हमारी संस्था का यह सतत प्रयास रहता है कि अध्ययनरत छात्र/छात्राओं के लिए बेहतर अकादमिक सुविधाए व वातावरण उपलब्ध कराया जाये । नियमित रूप से कक्षा - अध्यापन, सतत मूल्यांकन, वाद-विवाद प्रतियोगिताए, अतिथि व्याख्यान आदि गतिविधियों पर समुचित जोर दिया जाता है । महाविद्यालय के पुस्तकालय में विभिन्न विषयों के पाठ्यक्रमों से संबंधित अद्यतन पुस्तकें एवं संदर्भग्रंथ उपलब्ध हैं । प्रतिवर्ष नई पुस्तकों का क्रय पर्याप्त संस्था में किया जाता है । पुस्तकालय में यू.जी.सी.-एन.आर.सी. की सुविधा उपलब्ध है तथा INFLIBNET के N-LIST में यह महाविद्यालय शामिल किया जा चुका है । इसके माध्यम से महाविद्यालय के शिक्षकों व छात्र/छात्राओं के लिए विभिन्न प्रकार के संदर्भग्रंथों, पुस्तकों एवं पत्रिकाओं को e-form में अध्ययन करने की सुविधा सहज रूप से उपलब्ध है ।

विद्या सर्वस्य भूषणम् हमारा मार्गदर्शी वाक्य है । इस तथ्य में हमारी गहरी आस्था है कि ज्ञान ही सभी मनुष्यों का आभूषण है । ईश्वर से हमारी प्रार्थना है कि वह समस्त समाज को अज्ञान से ज्ञान की ओर तथा अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाये । मैं सभी छात्र/छात्राओं से कहना चाहती हूं कि वे अपनी ऊर्चा व समय का सदुपयोग ज्ञानार्जन में करें । महाविद्यालय में उपलब्ध समस्त सुविधाओं का लाभ उठायें और अपने बेहतर भविष्य का निर्माण करें । राज्य, देश व समस्त विश्व को उनसे कई अपेक्षाएं है । धन्यवाद.

डॉ. (श्रीमती) अलका मेश्राम

(प्राचार्य)